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शक्ति
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प्रस्तावना

संस्कृत में मण्डल का अर्थ है पवित्र ज्यामिति । वैदिक परम्परा में यह केवल ज्यामितीय आकृतियों का समूह नहीं, बल्कि सृष्टि की संरचना, चेतना और ऊर्जा के परस्पर संबंध का प्रतीक है । श्री श्री रविशंकर जी के अनुसार वैदिक ज्ञान को समझने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण[1] आवश्यक है । आधुनिक विज्ञान और ध्यान—दोनों की दृष्टि से इस ज्ञान को समझाने के उद्देश्य से श्री श्री इंस्टीट्यूट द्वारा मण्डल वाटिका[2] पाठ्यक्रम विकसित किया गया है । हमने यह पाठ्यक्रम किया है और उसके कुछ प्रमुख सिद्धांत यहाँ प्रस्तुत किए हैं । यदि आप इस विषय का गहन अध्ययन करना चाहते हैं, तो यह पाठ्यक्रम अवश्य करें ।

वैदिक ज्ञान

Shiv-Shakti

ऋग्वेद के नासदीय सूक्त (मण्डल १०, सूक्त १२९)[3] में सृष्टि के प्राकट्य का अत्यंत गहन वर्णन मिलता है । वैदिक दृष्टि से अस्तित्व को तीन स्तरों में समझा जा सकता है ।

  1. भूताकाश — यह स्थूल ब्रह्माण्ड है, जिसे हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ अनुभव कर सकती हैं । इसमें पंचमहाभूत—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—तथा उनसे निर्मित समस्त दृश्य सृष्टि सम्मिलित है ।
  2. चित्ताकाश — यह सूक्ष्म स्तर है, जिसमें मन, बुद्धि और अहंकार कार्य करते हैं । प्रत्येक ब्रह्माण्ड का अपना चित्ताकाश होता है ।
  3. चिदाकाश — यह चेतना का प्रथम आयाम है, जहाँ महातत्त्व, मूल प्रकृति तथा देव (जिनकी तुलना आधुनिक भौतिकी के मूलभूत कणों से की जा सकती है)[4] प्रकट होते हैं ।

इन तीनों स्तरों का आधार शिव तत्त्व है, जो शुद्ध, अनन्त और चेतन अस्तित्व है । वही समस्त सृष्टि का मूल अधिष्ठान है । वैदिक परम्परा में शिव किसी देवता विशेष का नाम नहीं, बल्कि उस परम चेतना का प्रतीक है, जिससे सम्पूर्ण सृष्टि का प्राकट्य होता है ।

वैदिक परम्परा के अनुसार लगभग १५.७४९ नील (१०१३) वर्ष[8] पूर्व शिव तत्त्व में प्रथम स्पंदन प्रकट हुआ, जिसे शक्ति कहा गया । इसी स्पंदन से चिदाकाश का प्राकट्य हुआ, जहाँ प्रथम देव प्रकट हुए । आगे चलकर इन्हीं के माध्यम से अनेक चित्ताकाशों तथा उनसे संबंधित भूताकाशों (ब्रह्माण्डों) का विकास हुआ । सामान्यतः शिव को पुरुष और शक्ति को प्रकृति के रूप में निरूपित किया जाता है । शक्ति के नौ प्रमुख रूप (नवदुर्गा) प्रकृति के विभिन्न आयामों तथा रसों का प्रतिनिधित्व करते हैं ।

जिसे हम रिक्त आकाश समझते हैं, वैदिक दृष्टि से वह वास्तव में शिव तत्त्व से व्याप्त है । यही समस्त सृष्टि का मूल आधार है । नासदीय सूक्त[7] तथा अन्य वैदिक ग्रंथों में इसी आधार से सृष्टि के क्रमिक प्राकट्य का विस्तृत वर्णन मिलता है ।

आधुनिक ज्ञान

"यदि आप ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझना चाहते हैं, तो ऊर्जा, आवृत्ति और कंपन के संदर्भ में सोचें।" — निकोला टेस्ला[9] । आधुनिक विज्ञान यह दर्शाता है कि विभिन्न आवृत्तियाँ पदार्थ को विविध ज्यामितीय आकृतियों में व्यवस्थित कर सकती हैं[10] । इसी प्रकार आधुनिक भौतिकी के कुछ सिद्धांत, जैसे स्ट्रिंग सिद्धांत, यह प्रस्तावित करते हैं कि मूलभूत स्तर पर पदार्थ की विभिन्न अवस्थाएँ सूक्ष्म कम्पनों से संबंधित हो सकती हैं ।

वैदिक दृष्टिकोण से यह एक रोचक समानता प्रस्तुत करता है । यदि शिव तत्त्व को समस्त अस्तित्व का मूल अधिष्ठान माना जाए, तो शक्ति का प्रथम स्पंदन उसी में विभिन्न देवों (जिनकी तुलना आधुनिक भौतिकी के मूलभूत कणों से की जा सकती है) के प्राकट्य का कारण बनता है । आगे चलकर इन्हीं मूल तत्त्वों के विविध संयोजनों से अधिक जटिल संरचनाओं—परमाणुओं, तारों, ग्रहों और जीवन—का विकास होता है ।

टिप्पणी

वैदिक और आधुनिक विज्ञान के बीच सबसे मूलभूत अंतर चेतना की भूमिका को लेकर है । वैदिक परम्परा के अनुसार चेतना ही अस्तित्व का आधार है और समस्त सृष्टि उसी का प्राकट्य है । इसके विपरीत आधुनिक भौतिकी पदार्थ और ऊर्जा के व्यवहार का अध्ययन करती है तथा चेतना के स्वरूप के संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं करती । इस कारण दोनों परम्पराएँ सृष्टि की व्याख्या भिन्न प्रारम्भिक मान्यताओं से करती हैं, यद्यपि कुछ स्थानों पर उनके निष्कर्षों में रोचक समानताएँ दिखाई देती हैं ।


संदर्भ

  1. YouTube, Sri Sri Ravi Shankara. How To Understand Mythology, Vedas, and Puranas. https://youtu.be/A0ObSI0ULUs
  2. Sri Sri Institute of Agricultural Sciences and Technology. Four Mandala Vaatika Courses. https://ssiast.spayee.com/
  3. YouTube, Sri Sri Ravi Shankar. Higgs Boson - God Particle. https://youtu.be/fXlWqzazAkY
  4. YouTube, Sri Sri Ravi Shankara. Time, Space, and God. https://youtu.be/6hXEZysidiU
  5. YouTube, Sri Sri Ravi Shankara. What is Dark Energy. https://youtu.be/XMyNWxNY2MQ
  6. YouTube, Sri Sri Ravi Shankara. What is Dark Matter. https://youtu.be/leDZXhWXt-0
  7. YouTube, Bharat Ek Koj Supplement. Nasadiya Sukta from Rigveda. https://youtu.be/wM8Sm-_OAhs
  8. YouTube, Shikhar Verma. Vedic Theories of the Universe. https://youtu.be/hEca1MiE4GA
  9. YouTube, Brusspup - Illusions and Science. Amazing Resonance Experiment. https://youtu.be/wvJAgrUBF4w
  10. YouTube, Mathologer. Times Tables & Mandelbrot. https://youtu.be/qhbuKbxJsk8
  11. YouTube, The Mathemagicians' Guild. Julia Sets and How They Relate to The Mandelbrot Set. https://youtu.be/dctJ7ISkU-4
  12. YouTube, TED, Anil Seth. Your Brain Hallucinates your Conscious Reality. https://youtu.be/lyu7v7nWzfo