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पृष्ठभूमि

संस्कृति का संबंध संस्कार से है । मानव जीवन को सुंदर, संतुलित और अर्थपूर्ण बनाने के लिए किया गया बौद्धिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक प्रयास ही संस्कृति है । यदि सभ्यता समाज के बाह्य विकास का परिचायक है, तो संस्कृति उसके आंतरिक विकास का आधार है ।

किसी समाज के जीवन-मूल्य, आदर्श, नैतिक सिद्धांत, दर्शन, साहित्य, कला, भाषा, परंपराएँ तथा रीति-रिवाज उसकी संस्कृति का निर्माण करते हैं । ये तत्व केवल व्यक्ति के व्यवहार को ही नहीं, बल्कि उसके विचारों, निर्णयों और जीवन-दृष्टि को भी प्रभावित करते हैं ।

संस्कृति का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व को परिष्कृत करना है । यही कारण है कि मानव जीवन को अप्रत्यक्ष रूप से समृद्ध बनाने वाली आध्यात्मिक, नैतिक, बौद्धिक और मानसिक उपलब्धियाँ संस्कृति का अभिन्न अंग मानी जाती हैं ।

सभ्यता और संस्कृति

सभ्यता और संस्कृति एक-दूसरे की पूरक हैं, किंतु दोनों का क्षेत्र भिन्न है । सभ्यता समाज की भौतिक उन्नति का परिचायक है, जबकि संस्कृति उसके विचारों, मूल्यों और आचरण का आधार है । सभ्यता यह बताती है कि समाज ने क्या प्राप्त किया, जबकि संस्कृति यह निर्धारित करती है कि उन उपलब्धियों का उपयोग किस उद्देश्य और किस प्रकार किया जाए ।

किसी समाज की वैज्ञानिक प्रगति, नगर-योजना, शासन व्यवस्था, व्यापार और तकनीकी विकास उसकी सभ्यता का भाग हैं । दूसरी ओर, सत्य, करुणा, अनुशासन, परिवार व्यवस्था, कला, साहित्य, संगीत और आध्यात्मिक चिंतन उसकी संस्कृति का निर्माण करते हैं । इसलिए किसी राष्ट्र की वास्तविक पहचान केवल उसकी सभ्यता से नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति से होती है ।

भारतीय संस्कृति

भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम और निरंतर विकसित होने वाली संस्कृतियों में से एक है । इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें भौतिक उन्नति और आध्यात्मिक विकास को परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे का पूरक माना गया है । यही कारण है कि भारतीय संस्कृति ने विविध मतों, परंपराओं और जीवन-पद्धतियों को स्वीकार करते हुए भी अपनी मूल पहचान को बनाए रखा है ।

भारतीय संस्कृति का मूल आधार धर्म, कर्तव्य, परिवार, सह-अस्तित्व, प्रकृति के प्रति सम्मान तथा आत्म-विकास है । इन्हीं मूल्यों ने हजारों वर्षों से समाज को स्थिरता, सहिष्णुता और निरंतर विकास की दिशा प्रदान की है । यही विशेषताएँ भारतीय संस्कृति को विश्व की अन्य संस्कृतियों से विशिष्ट बनाती हैं ।