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पृष्ठभूमि

भारत विश्व की सबसे प्राचीन और निरंतर विकसित होने वाली सभ्यताओं में से एक है । हजारों वर्षों के इतिहास में इसने ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, संस्कृति, व्यापार, शिक्षा और आध्यात्मिकता जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया । इन योगदानों का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विश्व की अनेक सभ्यताओं के विकास में भी दिखाई देता है ।

समय के साथ अनेक भारतीय विचार, तकनीकें, परंपराएँ और संस्थाएँ विश्व के विभिन्न भागों तक पहुँचीं । इनमें से कुछ ने स्थानीय संस्कृतियों का रूप ले लिया, जबकि कुछ आज भी अपने मूल स्वरूप में विद्यमान हैं । अनेक उपलब्धियों का भारतीय मूल समय के साथ धूमिल हो गया, जबकि अनेक भारतीय परंपराएँ आज भी भविष्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं ।

इस अनुभाग का उद्देश्य भारत के इन बहुआयामी योगदानों का परिचय कराना है । उपलब्ध ऐतिहासिक, साहित्यिक, पुरातात्त्विक तथा सांस्कृतिक प्रमाणों के आधार पर यहाँ उन प्रमुख विषयों का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है जिन्होंने भारत की वैश्विक पहचान के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

भारत को समझने के पाँच आयाम

भारत की वैश्विक भूमिका को समझने के लिए इस अनुभाग को पाँच प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है । प्रत्येक भाग भारतीय सभ्यता के एक विशिष्ट पक्ष का परिचय कराता है ।

इन पाँचों आयामों का संयुक्त अध्ययन हमें यह समझने में सहायता करता है कि भारत का योगदान केवल उसके गौरवशाली अतीत तक सीमित नहीं है । भारत की ज्ञान-परंपरा, जीवन-दृष्टि और अनुभव आज भी वर्तमान और भविष्य के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं ।


संदर्भ

  1. D. K. Hari, D. K. Hema Hari (2017). Brand Bharat Autobiography of India, Bharat Gyan Series. Bangalore: Sri Sri Publications Trust