पृष्ठभूमि
भारत केवल वस्तुओं और तकनीकों का ही उद्गम स्थल नहीं रहा, बल्कि अनेक ऐसे विचारों, परंपराओं, मान्यताओं, प्रतीकों और जीवन-पद्धतियों का भी जन्मस्थान रहा है जिन्होंने विश्व की विभिन्न सभ्यताओं को गहराई से प्रभावित किया । समय के साथ इनका व्यापक प्रसार हुआ और अनेक देशों में इन्हें स्थानीय परंपराओं का अंग मान लिया गया, जिससे इनके भारतीय मूल की पहचान धीरे-धीरे धूमिल होती चली गई ।
भारत में उपजी अनुभाग का उद्देश्य उन विचारों, परंपराओं, सांस्कृतिक प्रतीकों, शब्दों, प्रथाओं तथा जीवन-मूल्यों का परिचय कराना है जिनका उद्गम अथवा प्रारंभिक विकास भारत में हुआ और जो आज विश्व के अनेक देशों में विभिन्न रूपों में प्रचलित हैं । प्रत्येक विषय में उपलब्ध ऐतिहासिक, साहित्यिक, भाषायी तथा सांस्कृतिक प्रमाणों के आधार पर उसके विकास और वैश्विक प्रसार का परिचय प्रस्तुत किया गया है ।
इस अनुभाग का उद्देश्य केवल अतीत की उपलब्धियों का स्मरण करना नहीं, बल्कि यह समझना भी है कि भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपराओं ने मानव सभ्यता के विकास में कितनी व्यापक भूमिका निभाई है ।
भारत का वैश्विक सांस्कृतिक प्रभाव
प्राचीन काल से ही भारत का विश्व के अनेक देशों के साथ व्यापार, शिक्षा, तीर्थयात्रा तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता रहा । इन्हीं माध्यमों से भारतीय दर्शन, भाषाएँ, धार्मिक विचार, सामाजिक परंपराएँ, कलाएँ तथा जीवन-पद्धतियाँ एशिया, मध्य-पूर्व, अफ्रीका और यूरोप के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुँचीं । समय के साथ इनमें से अनेक परंपराएँ स्थानीय संस्कृतियों का अंग बन गईं ।
भारतीय संस्कृति की विशेषता यह रही कि उसने अपने विचारों का प्रसार विजय या बल प्रयोग से नहीं, बल्कि ज्ञान, व्यापार, शिक्षा, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक संवाद के माध्यम से किया । यही कारण है कि भारतीय प्रभाव विश्व के अनेक देशों में आज भी भाषा, रीति-रिवाजों, उत्सवों, स्थापत्य, दर्शन तथा सामाजिक जीवन में देखा जा सकता है ।
कुछ प्रमुख उदाहरण
इन उदाहरणों का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक देन की संपूर्ण सूची प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में उसके योगदान की एक प्रतिनिधि झलक देना है ।
- भाषा: संस्कृत से उत्पन्न अनेक शब्द, स्थान-नाम तथा भाषायी परंपराएँ ।
- दर्शन एवं आध्यात्मिकता: कर्म, धर्म, योग, ध्यान, गुरु-शिष्य परंपरा तथा अहिंसा के सिद्धांत ।
- प्रतीक: स्वस्तिक, कमल, पद्म, मंडल तथा ॐ जैसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रतीक ।
- परंपराएँ: नमस्ते, दीप प्रज्वलन, तिलक, प्रदक्षिणा, उत्सव तथा संस्कार ।
- शिक्षा: गुरुकुल परंपरा, तक्षशिला, नालंदा तथा ज्ञान के मौखिक संरक्षण की परंपरा ।
- जीवन-मूल्य: वसुधैव कुटुम्बकम्, सर्वे भवन्तु सुखिनः, प्रकृति के प्रति सम्मान तथा सह-अस्तित्व की भावना ।
इन विषयों का विस्तृत परिचय इस अनुभाग के आगामी पृष्ठों में प्रस्तुत किया गया है । प्रत्येक विषय के साथ उसके भारतीय मूल तथा विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में उसके प्रसार का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय दिया गया है ।
संदर्भ
- D. K. Hari, D. K. Hema Hari (2017). Brand Bharat Autobiography of India, Vol 2 - Roots in India. Bangalore: Sri Sri Publications Trust