cKlear कुरु वंश
Email

द्वापर युग

महाभारत, जिसका संकलन कलियुग के प्रारम्भ में हुआ, द्वापर युग की अवधि लगभग २४०० वर्षों[1] की बताता है । इस आधार पर द्वापर युग का काल लगभग ५५७७–३१७७ BCE माना जा सकता है । इस युग में भारतीय सभ्यता ने राजनीतिक, सांस्कृतिक तथा सैन्य दृष्टि से उल्लेखनीय प्रगति की । अनेक शक्तिशाली राजवंशों का उदय हुआ और महाभारत युद्ध के साथ इस युग का समापन हुआ, जिसके पश्चात कलियुग का प्रारम्भ माना जाता है ।

राजा दुष्यंत

महाभारत के आदि पर्व के अनुसार राजा दुष्यंत चंद्रवंश के एक प्रतापी शासक थे । उनका विवाह महर्षि विश्वामित्र और अप्सरा मेनका की पुत्री शकुंतला से हुआ । महर्षि कण्व के आश्रम में पले-बढ़े उनके पुत्र भरत आगे चलकर भारतीय इतिहास के महानतम सम्राटों में से एक बने । कालिदास के प्रसिद्ध नाटक अभिज्ञानशाकुन्तलम् ने इस कथा को अमर बना दिया ।

सम्राट भरत

सम्राट भरत राजा दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र थे तथा चंद्रवंश के महानतम शासकों में गिने जाते हैं । उन्होंने तत्कालीन जम्बूद्वीप के विशाल भूभाग को एकीकृत कर एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की । उनकी असाधारण वीरता, न्यायप्रियता और प्रशासनिक क्षमता के कारण उन्हें चक्रवर्ती सम्राट की उपाधि प्राप्त हुई । भारतीय परम्परा के अनुसार उनके ही नाम पर इस देश का नाम भारतवर्ष पड़ा, जो आज भी हमारी राष्ट्रीय पहचान का आधार है ।

श्री कृष्ण

भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद (परम्परानुसार श्रावण) मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि में हुआ था । उस समय चन्द्रमा रोहिणी नक्षत्र में वृषभ राशि में स्थित था । रामायण और महाभारत की भाँति, महाभारत में भी ग्रहों, नक्षत्रों तथा ऋतुओं का विस्तृत वर्णन मिलता है । आधुनिक खगोलीय गणनाओं के आधार पर अनेक शोधकर्ताओं ने इन घटनाओं का काल-निर्धारण किया है, जिसके अनुसार श्री कृष्ण का जन्म लगभग २१ जुलाई ३२२८ BCE को माना जाता है ।

श्री कृष्ण ने अत्याचारी कंस का वध कर धर्म की पुनः स्थापना की, द्वारका नगरी की स्थापना की तथा महाभारत काल में पाण्डवों के मार्गदर्शक, कूटनीतिज्ञ और सारथी बने । कुरुक्षेत्र के युद्ध के प्रारम्भ में अर्जुन के मोहग्रस्त होने पर उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया, जिसमें कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग तथा धर्म के सनातन सिद्धांतों का सार प्रस्तुत किया गया है । लगभग ८९ वर्ष की आयु में उन्होंने महाभारत युद्ध का नेतृत्व किया और धर्म की पुनः स्थापना में निर्णायक भूमिका निभाई ।

महाभारत

महाभारत का युद्ध लगभग १३ अक्टूबर ३१३९ BCE को प्रारम्भ हुआ माना जाता है । यह केवल हस्तिनापुर के उत्तराधिकार का युद्ध नहीं था, बल्कि धर्म और अधर्म, न्याय और अन्याय तथा आदर्श शासन व्यवस्था के बीच निर्णायक संघर्ष भी था । अठारह दिनों तक चले इस युद्ध में तत्कालीन भारतवर्ष के अधिकांश प्रमुख राजवंशों ने भाग लिया । युद्ध की समाप्ति के कुछ दशकों बाद श्री कृष्ण के देहावसान के साथ द्वापर युग का अंत हुआ और कलियुग का प्रारम्भ माना गया ।


संदर्भ

  1. The Chronology of India, Vedveer Arya. Manu to Mahabharata, Page 207. https://dokumen.pub/the-chronology-of-india-from-manu-to-mahabharata
  2. Art of Living, Facts About Mahabharata. https://www.artofliving.org/in-en/culture/reads/amazing-facts-of-mahabharata
  3. Art of Living, Facts About Krishna. https://www.artofliving.org/in-en/culture/amazing-india/facts-about-lord-krishna