आधारभूत मान्यताएँ
आधुनिक ब्रह्माण्ड विज्ञान में बिग बैंग प्रतिरूप[1] ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और उसके विकास की सर्वाधिक प्रचलित वैज्ञानिक व्याख्या है । यह प्रतिरूप अनेक प्रेक्षणों, गणितीय समीकरणों तथा भौतिक सिद्धांतों पर आधारित है । इसकी प्रमुख मान्यताओं में यह सम्मिलित है कि भौतिकी के नियम सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में समान रूप से लागू होते हैं, अत्यन्त बड़े पैमाने पर पदार्थ का वितरण लगभग सजातीय (Homogeneous) है, तथा सभी दिशाओं में ब्रह्माण्ड के गुण लगभग समान (Isotropic) हैं । इन्हीं मान्यताओं के आधार पर आधुनिक ब्रह्माण्ड विज्ञान का मानक प्रतिरूप निर्मित किया गया है ।
अंतरिक्ष का विस्तार
बिग बैंग को प्रायः किसी खाली स्थान में हुए विस्फोट के रूप में समझा जाता है, जबकि आधुनिक विज्ञान के अनुसार यह धारणा सही नहीं है । बिग बैंग अंतरिक्ष में हुआ विस्फोट नहीं था, बल्कि स्वयं अंतरिक्ष और समय के विस्तार की शुरुआत थी । समय के साथ अंतरिक्ष का विस्तार होने के कारण आकाशगंगाओं के बीच की दूरियाँ लगातार बढ़ रही हैं ।
यह विस्तार सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में बड़े पैमाने पर दिखाई देता है, किन्तु गुरुत्वाकर्षण से बँधी संरचनाएँ—जैसे हमारी आकाशगंगा, सौरमण्डल अथवा पृथ्वी—इस विस्तार के साथ नहीं फैलतीं । इनका आंतरिक गुरुत्वाकर्षण ब्रह्माण्डीय विस्तार की अपेक्षा कहीं अधिक प्रभावी होता है ।
ज्ञान की सीमा
ब्रह्माण्ड की आयु सीमित है, वह निरंतर विस्तार कर रहा है, और प्रकाश की गति भी सीमित है । इसलिए अत्यन्त दूर स्थित कुछ क्षेत्रों से निकला प्रकाश अभी तक हम तक नहीं पहुँच पाया है । इसके अतिरिक्त प्रारम्भिक ब्रह्माण्ड अत्यन्त गर्म और अपारदर्शी था, जिसके कारण हम महाविस्फोट के लगभग ३८०,००० वर्ष बाद तक की घटनाओं को ही प्रत्यक्ष रूप से देख सकते हैं । इससे हमारे प्रेक्षणों की एक सीमा निर्धारित होती है, जिसे प्रेक्षणीय ब्रह्माण्ड (Observable Universe) कहा जाता है ।
इसी प्रकार ब्रह्माण्ड का विस्तार निरंतर तीव्र गति से हो रहा है । परिणामस्वरूप कुछ अत्यन्त दूर स्थित आकाशगंगाओं तक हमारे द्वारा आज भेजा गया कोई भी संकेत भविष्य में कभी नहीं पहुँच सकेगा । यह सीमा ब्रह्माण्डीय क्षितिज (Cosmic Horizon) कहलाती है और यह निर्धारित करती है कि भविष्य में हम ब्रह्माण्ड के किन क्षेत्रों को प्रभावित कर सकते हैं । इन कारणों से ब्रह्माण्ड के अतीत और भविष्य—दोनों के संबंध में हमारा ज्ञान स्वाभाविक रूप से सीमित है ।
अपूर्वता
सामान्य सापेक्षता के समीकरणों के अनुसार यदि ब्रह्माण्ड के विस्तार को समय में पीछे ले जाया जाए, तो एक ऐसी अवस्था प्राप्त होती है जहाँ घनत्व और तापमान अनंत हो जाते हैं । इस काल्पनिक अवस्था को अपूर्वता (Singularity) कहा जाता है । अधिकांश वैज्ञानिक इसे वास्तविक भौतिक अवस्था के बजाय इस बात का संकेत मानते हैं कि उस समय हमारे वर्तमान भौतिक सिद्धांत पर्याप्त नहीं रह जाते और हमें गुरुत्वाकर्षण तथा क्वांटम भौतिकी का एकीकृत सिद्धांत आवश्यक होगा ।
एक अन्य रोचक प्रश्न यह है कि प्रारम्भिक ब्रह्माण्ड का घनत्व इतना अधिक होने के बावजूद वह ब्लैक होल में क्यों नहीं परिवर्तित हुआ । इस प्रश्न का पूर्ण उत्तर अभी उपलब्ध नहीं है और यह आधुनिक ब्रह्माण्ड विज्ञान के सक्रिय अनुसंधान विषयों में से एक है ।
ब्रह्माण्डीय प्रस्फीति
महाविस्फोट के तुरंत बाद का प्रारम्भिक काल आधुनिक ब्रह्माण्ड विज्ञान के सबसे रोचक चरणों में से एक है । वर्तमान प्रतिरूप के अनुसार लगभग १०-४३ सेकंड तक ब्रह्माण्ड ऐसी अवस्था में था जहाँ प्रकृति के चारों मूलभूत बल संभवतः एकीकृत थे । इसके पश्चात लगभग १०-३६ से १०-३२ सेकंड के बीच ब्रह्माण्ड ने अत्यन्त तीव्र गति से विस्तार किया । इस चरण को ब्रह्माण्डीय प्रस्फीति (Cosmic Inflation) कहा जाता है । इस अत्यल्प समय में ब्रह्माण्ड का आकार असंख्य गुना बढ़ गया तथा उसका तापमान अत्यधिक कम हो गया ।
ब्रह्माण्डीय प्रस्फीति आधुनिक विज्ञान की अनेक समस्याओं, जैसे ब्रह्माण्ड की एकरूपता, उसकी लगभग समतल ज्यामिति तथा चुंबकीय एकध्रुवों (Magnetic Monopoles) की अनुपस्थिति, की व्याख्या करने में सहायक मानी जाती है । यद्यपि इस सिद्धांत के पक्ष में अनेक अप्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध हैं, फिर भी प्रस्फीति का मूल कारण आज भी अनुसंधान का विषय है ।
शीतलन
ब्रह्माण्ड के विस्तार के साथ उसका तापमान लगातार घटता गया । लगभग १०-११ सेकंड के बाद कणों की ऊर्जा उस स्तर तक पहुँच गई जिसे आधुनिक प्रयोगशालाओं में उत्पन्न किया जा सकता है । लगभग १०-६ सेकंड के बाद क्वार्क मिलकर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जैसे कणों का निर्माण करने लगे । इसी अवधि में पदार्थ और प्रतिपदार्थ के अधिकांश कण परस्पर विनष्ट हो गए और प्रत्येक लगभग १०८ युग्मों में से केवल एक पदार्थ कण शेष बचा । यही सूक्ष्म असंतुलन आगे चलकर सम्पूर्ण दृश्य ब्रह्माण्ड का आधार बना ।
लगभग एक सेकंड के बाद इलेक्ट्रॉनों और पॉज़िट्रॉनों के अधिकांश युग्म भी परस्पर विनष्ट हो गए । लगभग तीन मिनट के भीतर हाइड्रोजन तथा हीलियम के प्रारम्भिक नाभिक बनने लगे । इसके लगभग ३८०,००० वर्ष बाद इलेक्ट्रॉन इन नाभिकों से जुड़कर प्रथम तटस्थ परमाणु बने, जिनमें अधिकांश हाइड्रोजन थे । इसी समय प्रकाश स्वतंत्र रूप से अंतरिक्ष में यात्रा करने लगा, जिसका अवशेष आज कॉस्मिक माइक्रोवेव पृष्ठभूमि विकिरण (Cosmic Microwave Background Radiation) के रूप में देखा जाता है ।
तारों और आकाशगंगाओं का निर्माण
प्रथम परमाणुओं के बनने के बाद ब्रह्माण्ड का अधिकांश भाग हाइड्रोजन और हीलियम गैस से भरा हुआ था । गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से यह गैस धीरे-धीरे विशाल बादलों में संगठित होने लगी । समय के साथ इन बादलों का घनत्व बढ़ा और उनसे प्रथम तारों तथा आकाशगंगाओं का निर्माण हुआ । इन तारों के भीतर नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया से कार्बन, ऑक्सीजन, लोहा तथा अन्य भारी तत्त्वों का निर्माण हुआ, जो आगे चलकर ग्रहों और जीवन के लिए आवश्यक आधार बने ।
सौरमण्डल का निर्माण
आधुनिक विज्ञान के अनुसार लगभग ४.६ अरब वर्ष पूर्व गैस और धूल के एक विशाल बादल के गुरुत्वीय संकुचन से सूर्य तथा उसके चारों ओर का सौरमण्डल बना । शेष पदार्थ के संघनन से ग्रह, उपग्रह, क्षुद्रग्रह और धूमकेतु बने । इन्हीं ग्रहों में से एक पृथ्वी है, जिस पर उपयुक्त तापमान, जल तथा वातावरण के कारण जीवन के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न हुईं ।
जीवन का विकास
आधुनिक जीवविज्ञान के अनुसार पृथ्वी पर जीवन का प्रारम्भ लगभग ३.५ से ४ अरब वर्ष पूर्व एककोशिकीय जीवों के रूप में हुआ । इसके पश्चात अरबों वर्षों में विकास (Evolution) की प्रक्रिया के माध्यम से अधिक जटिल जीवों का उद्भव हुआ । इसी क्रम में पौधों, जंतुओं तथा अंततः मनुष्य का विकास हुआ । जीवन की उत्पत्ति की सटीक प्रक्रिया आज भी अनुसंधान का विषय है, किन्तु उसके विकास के सिद्धांत को जीवाश्मों, आनुवंशिकी तथा आणविक जीवविज्ञान से व्यापक समर्थन प्राप्त है ।
सारांश
आधुनिक विज्ञान ब्रह्माण्ड के विकास का एक विस्तृत गणितीय और प्रेक्षण-आधारित प्रतिरूप प्रस्तुत करता है । महाविस्फोट से लेकर आकाशगंगाओं, तारों, ग्रहों और जीवन की उत्पत्ति तक की अनेक घटनाओं का सफलतापूर्वक वर्णन किया जा चुका है । फिर भी ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, महाविस्फोट से पूर्व की अवस्था, डार्क मैटर, डार्क ऊर्जा तथा जीवन की वास्तविक उत्पत्ति जैसे अनेक मूलभूत प्रश्न आज भी अनुत्तरित हैं और आधुनिक विज्ञान में सक्रिय अनुसंधान के विषय बने हुए हैं ।
संदर्भ
- Wikipedia, The Free Encyclopedia. Big Bang. https://en.wikipedia.org/wiki/Big_Bang